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Saturday, September 15, 2012

शून्य से शिखर का सफर

भारत में धर्म और जाति आधारित राजनीति करनेवालों की खूब लानत मलामत की जाती है और यह कहा जाता है कि यह समाज को बांटने की राजनीति करते हैं । सही भी है । लेकिन उनमें से कुछ विद्वान उत्साह में पश्चिमी देशों से सीख लेने की सलाह देते हुए जाति और धर्म से उपर उठकर राजनीति करने कीनसीहत देते हैं । दरअसल ऐसा करनेवाले लोग अज्ञानता में इस तरह की बयानबाजी कर देते हैं । पश्चिमी देशों में भी जाति या नस्ल और धर्म आधारित राजनीति का अब भी बोलबाला है और वहां भी इसके खिलाफ जंग जारी है । अगर देखें तो अमेरिका में तमाम सुधारों और दावों के बावजूद वहां नस्ल या रंग और धर्म के आधार पर वोटिंग होती है और गैर अमेरिकी शख्सियत को चुनाव में जाने पर तमाम तरह के आरोपों और अपमान का दंश झेलना पड़ता है । इस बात को बेहद शिद्दत के साथ नॉर्थ करोलिना की गवर्नर बनने वाली पहली भारतीय महिला निकी हेली ने अपनी आत्मकथा या संस्मरणात्मक किताब - कांट इज नॉट एन ऑप्शन, माई अमेरिकन स्टोरी- में बताया है ।
निकी हेली जब पहली बार चुनाव लड़ रही थी तो उनपर उनके धर्म को लेकर गंभीर इल्जाम लगे थे । दरअसल सिख परिवार में पैदा होनेवाली निकी ने अपनी शादी के बाद क्रिश्चियन धर्म अपना लिया था लेकिन सिख धर्म में भी अपनी आस्था कायम रखी थी । वो शादी के बाद भी गुरुद्वारे जाती रहती थी । चुनाव के दौरान उनपर दो धर्मों को मानने के आरोप लगे जो परोक्ष रूप से क्रिश्चियन धर्म में उनकी आस्था को संदिग्ध करनेवाली थे । लिहाजा निकी को इसकी सफाई देते हुए कहना पड़ा था- क्राइस्ट में मेरा अटूट विश्वास और गहरी आस्था है और मैं हर रोज अपने फैसलों के पहले उनसे गाइडेंस लेती हूं । उन्होंने सफाई देने के अंदाज में आगे लिखा- भगवान ने हमें और हमारे परिवार को बहुत कुछ दिया है और हर रोज वो हमें काम करने की शक्ति देता है । क्रिश्चियन होने के लिए हर रोज इस बात का डंका पीटना जरूरी नहीं है बल्कि जरूरी है कि क्राइस्ट को हर वक्त जिया जाए । प्रत्यक्ष रूप से निकी ने ये बयान जरूर दिया लेकिन साथ ही उसने ये संदेश भी दे दिया कि भक्ति और पंथ को चुनने का अधिकार निहायत ही व्यक्तिगत है । इससे उसने सिखों और क्रिश्चियन दोनों को एक संदेश दे दिया ।
दरअसल अगर हम इस किताब को देखें तो इसमें अमृतसर के एक सिख परिवार के भारत से निकलकर कनाडा होते हुए अमेरिका में जाकर बसने के संघर्ष से लेकर खुद को और अपने बच्चों को स्थापित की करने की दास्तान है । करीब ढाई सौ पन्नों में लिखी गई इस किताब में एक सिख परिवार की अपने और अपने बच्चों के सपने को साकार करने की प्रेरणादायक कहानी है । निकी हेली ने लिखा है कि उनके माता पिता पंजाब में पैदा हुए थे । उनके मुताबिक उनका परिवार बेहद धनी था । उनकी मां अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास एक छह मंजिला इमारत में रहती थी जहां ऐशो आराम की तमाम सहूलियतें मौजूद थी । निकी के मुताबिक उसकी नानी को किसी पर यकीन नहीं था लिहाजा वो सारे अपनी नकदी अपने बिस्तर के गद्दे में छुकार रखती थी जिसपर वो सोया करती थी । उनकी मां राज कभी भी अपना काम खुद नहीं करती थी और उसको स्कूल ले जाने के लिए भी नौकर हुआ करते थे जो उनका बस्ता तक ढोते थे । जब भारत में महिलाओं की शिक्षा को लेकर उत्साह नहीं था उस वक्त में उसकी निकी की मां ने कानून की पढ़ाई की थी । निकी ने दावा किया है कि उसकी मां को कानून की पढ़ाई करने के बाद भारत की पहली महिला न्यायाधीश बनने का प्रस्ताव भी आया था जिसे उन्होंने ठुकरा दिया ।
दरअसल इस पारिवारिक पृष्ठभूमि को बताने के पीछे मकसद ये है कि वो साबित करे कि उसके मां-बाप ने अपना मुकाम हासिल करने के लिए कितना संघर्ष किया । किस तरह से अपनी ऐशो आराम की जिंदगी छोडकर उनके मां-बाप अपने बच्चों और अपनी बेहतरी के लिए अमेरिका चले गए । निकी के पिता अजित रंधावा कहा करते थे कि अगर कोई शख्स कड़ी मेहनत करता है और खुद के प्रति ईमानदार रहता है तो उसको सफलता के शिखर को चूमने से कोई रोक नहीं सकता है । अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि की चर्चा करते हुए निकी बताती है कि भारत के पहाड़ी शहर धर्मशाला में उनके पिता और मां ने एक दूसरे को देखा और करीब करीब पहली नजर का प्यार शादी में बदल गया । शादी के बाद बॉयोलॉजी में पीएचडी करने के लिए अजित कनाडा के वैंकुवर के ब्रिटिश कोलंबिया युनिवर्सिटी चले गए । वहां अपनी पत्नी राज को भी बुला लिया जो अपनी आंखों में एक सपना लेकर वहां पहुंचती है । लेकिन वहां की स्थितियां उनके सपने को चकनाचूर कर देती है । छह मंजिला इमारत में रहनेवाली राज एक छोटे से घर में बगैर नौकर चाकर के खुद सारा काम संभालती है । आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए तीन जगहों पर पार्ट टाइम नौकरी करके परिवार चलाने लायक खर्चा जुटाने में पति की मदद भी करनी पड़ी । राज ने पोस्ट ऑफिस में काम किया, एवन के उत्पादों की बिक्री की और साथ ही स्पेशल बच्चों की देखभाल का काम करके पैसे जुटाए ।
लेकिन रंधावा परिवार का भविष्य अमेरिका में उनका इंतजार कर रहा था । अजित को दक्षिण कैरोलिना में प्रोफेसर की नौकरी मिलती है साठ के दशक के अंत में तो वह परिवार समेत बैम्बर्ग आ जाते हैं । निकी हेली का बचपन उसी शहर में बीता जहां उसके पिता को सिखों की पगड़ी की वजह से अलग दिखते थे । उन्हें हर वक्त ताने और उलाहने झेलने पड़ते थे । उस वक्त अमेरिका में नस्लवाद अपने चरम पर था । जब भी निकी का परिवार कहीं जाता था तो उनसे पूछा जाता था कि वो ब्लैक हैं या व्हाइट । इस तरह की परिस्थितियों से जूझते हुए निकी के पिता और मां ने अपनी लगन और मेहनत से बैम्बर्ग में एक मुकाम हासिल किया । उसकी मां ने कपड़ों का कारोबार शुरु किया और जो वक्त के साथ बढ़ता चला गया । अब तो वो कारोबार करोड़ों का है । निकी हेली का बचपन भी संघर्ष में बीता और बारह साल की उम्र में स्कूल के बाद उसने भी बुककीपिंग और अकाउंटिंग का काम किया । अपने परिवार के कारोबार में आने वाली सरकारी बाधाओं और नौकरशाही द्वारा लगानेवाले अंडंगा को देखकर उसका मन दुखी हो जाता था और वो उसको दूर करने के बारे में सोचने लगती थी । यहीं से उसके मन में राजनीति में जाने की इच्छा बलवती होने लगी थी ।
इस किताब में निकी हेली ने अपनी कई व्यक्तिगत संस्मरण या घटनाओं का भी जिक्र किया है । एक दिलचस्प घटना- एक दिन अचानक निकी अपने ब्याय फ्रेंड माइकल हेली को लेकर घर पहुंच जाती है । अपने मां-बाप से मिलवाते हुए कहती है कि वो इनसे शादी करना चाहती है । एक पारंपरिक भारतीय मां-बाप की तरह राज और अजित रंधावा ने गैर भारतीय से शादी करने की बेटी की इच्छा का जमकर विरोध किया । उन्होंने इस बात की हर संभव कोशिश की उनकी दूसरी बेटी एक अमेरिकी से शादी ना करे । लेकिन ये हो न सका क्योंकि - कांट इज नॉट एन ऑप्शन । ये शादी होती है और उसके बाद शुरू होता है उसका राजनीतिक सफर । राजनीति में रंगभेद के अलावा सरकारी बाधा और नौकरशाही के बेवजह अड़ंगे के मुद्दे पर निकी चुनाव मैदान में उतरती है । चुनाव में उसने वहां लंबे समय से राजनीति कर रहे शख्स को मात दी । निकी ने तमाम विरोध को झेलते हुए मजबूती से अपने सुधारों को लागू किया । आज निकी हेली रिपब्लिकन पार्टी में अमेरिका के उपराष्ट्रपति पद के लिए बॉबी जिंदल, कोंडलिजा राइस के साथ एक मजबूत दावेदार है ।
निकी हेली पर गवर्नर रहते हुए कई संगीन इल्जाम लगे । अमेरिका में राजनैतिक विरोधियों को निबटाने के लिए विवाहेत्तर संबंधों के आरोप लगते रहे हैं । इसी तरह की साजिश निकी के खिलाफ भी हुई और उनपर अपनी पति से बेवफाई के इल्जाम लगे । इन इल्जामों पर भी निकी ने अपनी इस किताब में सफाई दी है । इस फ्रंट पर मात खाने के बाद निकी के विरोधियों ने उनपर सरकार में रहते हुए कारोबारियों के लिए लॉबिंग करने के आरोप लगाए । उन आरोपों की भी जांच की गई लेकिन वो भी निराधार निकले ।
इस किताब के शुरुआती हिस्से बेहद दिलचस्प हैं जिसमें निकी ने नक्सवाद को झलने की  पीड़ा पर लिखा है । इसमें उसने बताया है कि किस तरह से एक ब्यूटी कॉंटेस्ट में उसको उसके रंग की बिनाह पर अयोग्य करार दे दिया गया था । इस तरह के कई दिलचस्प लेकिन पीड़ा दायक प्रसंग हैं । चौदह अध्याय में विभक्त इस संस्मरणात्मक आत्मकथा में बाद में अपनी राजनैतिक हालात का वर्णन किया है जो कि अमेरिका की राजनीति में गहरी रुचि रखनेवालों के लिए पठनीय हो सकता है, आम पाठकों को उससे बोरियत होगी । अगर हम समग्रता में इस किताब पर विचार करें उसको एक भारतीय परिवार की घर से निकलकर दूसरे मुल्क में खुद को सफलता के शीर्ष पर स्थापित करने वाली प्रेरणादायक कहानी कह सकते हैं । किसी ने ठीक कहा है कि अगर निकी हेली अपने सिद्धांतो और विचारों पर मजबूती से लंबे समय तक टिकी रह सकी तो विश्व इतिहास में बैम्वर्ग को वही स्थान हासिल हो सकता है जो ग्रेट ब्रिटेन की आयरन लेडी के जन्मस्थान ग्रांथम को हासिल है ।

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